शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है और शनिवार का दिन उन्हें समर्पित होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं और उनकी कृपा से जीवन में बड़े बदलाव संभव हैं, वहीं उनकी नाराजगी जीवन में कई तरह की बाधाएं भी ला सकती है। माना जाता है कि जब किसी राशि पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चलती है तो मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं।
पीपल की पूजा का विशेष महत्व
शनिवार के दिन पीपल वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन सुबह पीपल में जल अर्पित करने और परिक्रमा करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा शाम के समय पीपल के नीचे दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे शनि दोष के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।
दीपक में सरसों तेल और काले तिल का महत्व
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, शनिवार की शाम सूर्यास्त के बाद पीपल के नीचे मिट्टी का दीपक जलाना चाहिए। दीपक में शुद्ध सरसों का तेल डालने के साथ उसमें कुछ काले तिल मिलाना बेहद शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि काले तिल शनि देव को प्रिय होते हैं और इन्हें दीपक में मिलाने से इसका प्रभाव और बढ़ जाता है। दीपक जलाते समय गोल बत्ती का उपयोग करना और ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का 11 या 21 बार जाप करना भी लाभकारी माना गया है।
साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव को कम करने का उपाय
मान्यताओं के अनुसार, सरसों तेल और काले तिल से जलाया गया दीपक शनि दोष के प्रभाव को कम करने में सहायक माना जाता है। इससे जीवन में आने वाली बाधाओं और परेशानियों में कमी आने की बात कही जाती है। साथ ही, पीपल वृक्ष की सात बार परिक्रमा करने से भी शुभ फल प्राप्त होने की मान्यता है।
किन राशियों पर चल रहा है शनि का प्रभाव
ज्योतिष के अनुसार, वर्तमान में मेष, कुंभ और मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव बताया जा रहा है, जबकि सिंह और धनु राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है। ऐसे में इन राशि के जातकों को शनिवार के दिन पीपल की पूजा और दीपदान विशेष रूप से करने की सलाह दी जाती है।
